इंडस्ट्री में एआई उपयोग

TRAI का AI ड्राफ्ट आया: टेलीकॉम कंपनियों पर कड़ी नजर!

Suvadip Ghara
By Suvadip Ghara On October 31, 2026
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अरे भाई सुनो, मार्केट में एकदम गदर मच गया है — और इस बार गदर किसी नए फोन या चैटबॉट का नहीं, बल्कि उस नियम का है जो आपके फोन के नेटवर्क के पीछे चलने वाले AI को काबू में रखने के लिए आया है। भारतीय दूरसंचार नियामक TRAI ने टेलीकॉम नेटवर्क और सेवाओं में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। सीधी बात नो बकवास — यह अभी फाइनल कानून नहीं है, बल्कि एक ड्राफ्ट प्रस्ताव है, जिस पर 27 नवंबर 2026 तक राय मांगी गई है।

मतलब साफ है: टेलीकॉम कंपनियां AI को जैसे चाहें, वैसे नहीं चला पाएंगी — कम से कम अगर यह ड्राफ्ट फाइनल रूप में आता है तो नहीं। अब हर AI सिस्टम की जिम्मेदारी तय होगी, रिस्क की श्रेणी बनेगी, और बड़े हादसों की रिपोर्ट TRAI तक पहुंचेगी।

TRAI का ड्राफ्ट क्या है और कब आया?

Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने 30 अक्टूबर 2026 को ड्राफ्ट “Guidelines on Responsible Use of Artificial Intelligence (AI) in Telecommunication Networks and Provision of Telecommunication Services” जारी किया है। TRAI की प्रेस रिलीज संख्या 145/2026 के अनुसार यह ड्राफ्ट हितधारकों की टिप्पणियों के लिए रखा गया है।

यह पहल फरवरी 2026 में भारत सरकार द्वारा जारी India AI Governance Guidelines पर आधारित है। उन गाइडलाइंस के सात सूत्र हैं: Trust is the Foundation, People First, Innovation over Restraint, Fairness and Equity, Accountability, Understandable by Design, और Safety, Resilience and Sustainability। TRAI का ड्राफ्ट इन्हीं सिद्धांतों को टेलीकॉम सेक्टर में लागू करने का एक सेक्टर-विशेष प्रस्ताव है।

ड्राफ्ट में सबसे बड़े प्रस्ताव क्या हैं?

1. बोर्ड से मंजूर AI पॉलिसी होगी जरूरी

ड्राफ्ट के अनुसार, कवर होने वाली हर इकाई को एक आंतरिक AI पॉलिसी बनानी होगी, जिसे उसके बोर्ड या समकक्ष शासी निकाय से मंजूरी मिलनी चाहिए। खबरों के अनुसार, पॉलिसी के लागू होने के सात कार्य दिवसों के भीतर उसे TRAI के पास दाखिल करना प्रस्तावित है, और पॉलिसी की समीक्षा कम से कम हर वित्तीय वर्ष में एक बार करनी होगी।

2. हर AI सिस्टम की रिस्क श्रेणी तय होगी

हर AI सिस्टम को हाई-रिस्क, मीडियम-रिस्क या लो-रिस्क के रूप में वर्गीकृत करना होगा। वर्गीकरण में यह देखा जाएगा कि वह सिस्टम नेटवर्क और सेवा प्रावधान के लिए कितना महत्वपूर्ण है, उसके वित्तीय और परिचालन परिणाम क्या हो सकते हैं, और उपभोक्ताओं पर उसका क्या असर पड़ सकता है।

रिस्क श्रेणीवर्गीकरण का आधारड्राफ्ट में क्या प्रस्तावित है
हाई-रिस्कनेटवर्क, सेवा या उपभोक्ता पर अधिक प्रभावसख्त निगरानी, आकलन और जवाबदेही
मीडियम-रिस्कमध्यम महत्व और प्रभावनियंत्रित तैनाती और नियमित समीक्षा
लो-रिस्ककम महत्व और सीमित प्रभावपॉलिसी के दायरे में दर्ज और निगरानी योग्य व्यवस्था

ध्यान रहे, यह तालिका ड्राफ्ट में बताए गए वर्गीकरण के सिद्धांत को सरल भाषा में समझाती है; किसी श्रेणी के लिए कोई तय संख्यात्मक सीमा इस लेख में नहीं बताई गई है, क्योंकि ड्राफ्ट की खबरों में ऐसी सीमा सामने नहीं आई है।

3. बिना मंजूरी कोई AI सिस्टम नहीं चलेगा

ड्राफ्ट में प्रस्ताव है कि किसी AI सिस्टम को इस्तेमाल से पहले संस्था द्वारा नामित अधिकारी से मंजूरी लेनी होगी। तैनाती या बदलाव से पहले वैलिडेशन, अनुरूपता और प्रभाव आकलन भी प्रस्तावित हैं। साथ ही, हर AI सिस्टम पर मानवीय निगरानी बनाए रखने की बात कही गई है।

4. AI गवर्नेंस और सेफ्टी कमेटी

हर कवर इकाई को एक AI Governance and Safety Committee बनानी होगी, जिसकी अगुवाई एक वरिष्ठ कार्यकारी करेगा। इस कमेटी में नेटवर्क संचालन, सेवा वितरण, सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा प्रबंधन, नियामक और उपभोक्ता मामलों से जुड़े लोग शामिल होने प्रस्तावित हैं। सक्रिय, निष्क्रिय और बंद किए गए AI सिस्टम की सूची भी रखनी होगी।

5. AI हादसों की रिपोर्टिंग

AI से जुड़ी घटनाओं को चार स्तरों में बांटा गया है: क्रिटिकल, हाई, मॉडरेट और लो। ड्राफ्ट में प्रस्ताव है कि सभी घटनाएं दर्ज और जांची जाएं, जबकि क्रिटिकल और हाई गंभीरता वाली घटनाओं की रिपोर्ट TRAI को तय प्रारूप और तय समयसीमा में दी जाए। AI से जुड़े उपभोक्ता नुकसान की शिकायतों और उनके समाधान के लिए एक केंद्रीय डेटाबेस का भी प्रस्ताव है।

6. वेंडर का AI हो या अपना, जिम्मेदारी कंपनी की

यह ड्राफ्ट का सबसे तीखा हिस्सा है। प्रस्ताव के अनुसार, इकाई अपने इस्तेमाल वाले सभी AI सिस्टम के परिणामों के लिए जवाबदेह रहेगी — चाहे वह सिस्टम अंदर बनाया गया हो, किसी बाहरी वेंडर से खरीदा गया हो, या दोनों का मिश्रण हो। यानी “यह तो वेंडर का टूल था” वाला बहाना नहीं चलेगा।

यह ड्राफ्ट किस पर लागू होगा?

ड्राफ्ट उन इकाइयों पर लागू होने का प्रस्ताव रखता है जो Telegraph Act, 1885 के तहत लाइसेंस या Telecommunications Act, 2023 के तहत प्राधिकरण रखती हैं — टेलीकॉम सेवाएं देने के लिए, या संचार नेटवर्क स्थापित करने, चलाने, बनाए रखने या बढ़ाने के लिए — और जो अपने नेटवर्क या सेवाओं में AI का इस्तेमाल कर रही हैं या करने की योजना बना रही हैं।

TRAI के अनुसार, AI पहले से ही टेलीकॉम नेटवर्क में कई जगह इस्तेमाल हो रहा है — जैसे नेटवर्क प्रबंधन, फ्रॉड का पता लगाना, ग्राहक सेवा और प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस। इसी वजह से नियामक चाहता है कि इस इस्तेमाल के लिए एक स्पष्ट, एकसमान ढांचा हो।

क्या यह अभी फाइनल नियम है? क्या-क्या नहीं बदलेगा?

नहीं — यह बात बार-बार समझना जरूरी है। यह एक परामर्श ड्राफ्ट है, फाइनल नियम नहीं। अंतिम फैसले की कोई तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। खबरों के अनुसार, ड्राफ्ट में गैर-अनुपालन के लिए कोई अलग जुर्माना शेड्यूल नहीं दिया गया है, और कुछ पूर्व नियामक अधिकारियों ने इसे हल्के-स्पर्श वाले मार्गदर्शन के रूप में भी बताया है। इसलिए इसे अभी लागू कानून की तरह पेश करना गलत होगा।

साथ ही, यह ड्राफ्ट कॉल दरों, डेटा टैरिफ, सिम नियमों या मौजूदा रिचार्ज प्लान में कोई तत्काल बदलाव घोषित नहीं करता है। इसका फोकस नेटवर्क और सेवाओं में AI के इस्तेमाल की गवर्नेंस पर है, आम ग्राहक के प्लान पर नहीं।

आम जनता और भारतीय युवाओं के लिए क्यों है खास?

आम जनता के लिए यह खबर इसलिए खास है क्योंकि आपका कॉल, इंटरनेट और ग्राहक सेवा अनुभव अब धीरे-धीरे AI पर निर्भर होता जा रहा है। अगर AI सिस्टम में गड़बड़ होती है — गलत बिलिंग, गलत फ्रॉड अलर्ट, या नेटवर्क में रुकावट — तो अब उसकी रिकॉर्डिंग, जांच और गंभीर मामलों की रिपोर्टिंग की एक व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे जवाबदेही बढ़ेगी, हालांकि इसका असर तभी दिखेगा जब ड्राफ्ट फाइनल हो और सही तरीके से लागू हो।

भारतीय युवाओं के लिए यह एक नया करियर संकेत भी है। टेलीकॉम कंपनियों को अब AI पॉलिसी, रिस्क आकलन, ऑडिट, घटना जांच, डेटा सुरक्षा और नियामक अनुपालन जैसे कामों के लिए लोगों की जरूरत पड़ेगी। जो छात्र AI, नेटवर्किंग, साइबर सुरक्षा, कानून या डेटा गवर्नेंस सीख रहे हैं, उनके लिए “AI गवर्नेंस” एक उभरता हुआ क्षेत्र बन सकता है। यह कोई नौकरी की गारंटी नहीं है, लेकिन एक साफ दिशा जरूर है — तकनीक के साथ-साथ उसकी जिम्मेदारी भी सीखिए।

जो युवा रिसर्च, पॉलिसी या टेक कम्युनिटी से जुड़े हैं, वे इस परामर्श प्रक्रिया में हिस्सा भी ले सकते हैं। किसी भी परामर्श में भाग लेने से पहले ड्राफ्ट को TRAI की आधिकारिक वेबसाइट पर खुद पढ़ना सबसे सही तरीका है।

राय कैसे भेजें? स्टेप-बाय-स्टेप

  1. TRAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ड्राफ्ट गाइडलाइंस का दस्तावेज पढ़ें।
  2. अपनी टिप्पणी को बिंदुवार और स्पष्ट भाषा में लिखें — कौन सा प्रस्ताव ठीक है, किसमें सुधार चाहिए, और क्यों।
  3. टिप्पणी को इलेक्ट्रॉनिक रूप में भेजने को प्राथमिकता दें।
  4. टिप्पणी TRAI के सलाहकार (नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और लाइसेंसिंग) श्री अखिलेश कुमार त्रिवेदी को advmn@trai.gov.in पर भेजें।
  5. 27 नवंबर 2026 की अंतिम तिथि से पहले अपनी टिप्पणी भेजना सुनिश्चित करें — देर होने पर वह परामर्श में शामिल नहीं हो पाएगी।

टिप्पणी भेजते समय अपने व्यक्तिगत दस्तावेज या संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें; केवल ड्राफ्ट से जुड़ी पेशेवर राय भेजें।

निष्कर्ष

सीधी बात यह है कि TRAI का यह ड्राफ्ट टेलीकॉम में AI के “बिना लगाम” दौर को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है — लेकिन अभी यह कदम प्रस्ताव की अवस्था में है। बोर्ड से मंजूर पॉलिसी, रिस्क वर्गीकरण, मानवीय निगरानी और गंभीर हादसों की रिपोर्टिंग जैसे प्रस्ताव, अगर फाइनल होते हैं, तो कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाएंगे और उपभोक्ताओं को भी सुरक्षा का एक ढांचा देंगे।

अब गेंद हितधारकों के पाले में है। 27 नवंबर 2026 तक मिलने वाली राय ही तय करेगी कि फाइनल गाइडलाइंस कैसी होंगी। इसलिए इस खबर को सिर्फ पढ़कर छोड़िए मत — अगर आप टेलीकॉम, AI या पॉलिसी से जुड़े हैं, तो ड्राफ्ट पढ़िए और अपनी राय समय पर भेजिए।

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आधिकारिक जानकारी के लिए TRAI की वेबसाइट देखें: TRAI की आधिकारिक वेबसाइट

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