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Sarvam-Krutrim ने हथियाई भारत की 68% AI फंडिंग!

Suvadip Ghara
By Suvadip Ghara On October 29, 2026
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अरे भाई सुनो, मार्केट में एकदम गदर मच गया है। भारत में अपनी भाषाओं के लिए AI बनाने वाली कंपनियों पर पैसों की बारिश तो हो रही है, लेकिन एक चौंकाने वाला सच सामने आया है — इस बारिश का 68% हिस्सा सिर्फ दो कंपनियों की झोली में गिरा है। जी हां, Sarvam और Krutrim ने मिलकर भारत की Indic AI फंडिंग का दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सा हथिया लिया है।

डेटा-इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Tracxn की 28 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट “Indic AI: Building AI for Bharat” ने यह तस्वीर साफ कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय भाषाओं पर केंद्रित AI बनाने वाली 34 कंपनियों ने अब तक कुल 687 मिलियन डॉलर की घोषित इक्विटी फंडिंग जुटाई है। और इसमें से 464 मिलियन डॉलर — यानी 68% — अकेले Sarvam और Krutrim के नाम है। सीधी बात नो बकवास — भारत की देसी AI की कहानी अभी दो हीरो के इर्द-गिर्द घूम रही है।

Tracxn रिपोर्ट के सबसे बड़े खुलासे

Tracxn की रिपोर्ट में 34 कंपनियों को ट्रैक किया गया है, जो अनुवाद, स्पीच रिकग्निशन और भारतीय भाषाओं पर ट्रेन किए गए लैंग्वेज मॉडल जैसे प्रोडक्ट बना रही हैं। इन कंपनियों को दो खेमों में बांटा गया है — 18 कंपनियां ऐसी हैं जिनका मुख्य प्रोडक्ट ही भाषा तकनीक है, और 16 कंपनियां ऐसी हैं जो भाषा क्षमता को अपने बड़े एंटरप्राइज या कंज्यूमर प्रोडक्ट में एक फीचर की तरह इस्तेमाल करती हैं।

साल 2026 की कहानी तो और भी दिलचस्प है। 15 अक्टूबर 2026 तक इस सेक्टर ने 9 फंडिंग राउंड में 399 मिलियन डॉलर जुटाए, जबकि पूरे 2025 में भी सिर्फ 9 राउंड में 23 मिलियन डॉलर ही आए थे। यानी एक साल में फंडिंग करीब 17 गुना बढ़ गई — लेकिन यह बढ़ोतरी लगभग पूरी की पूरी एक ही कंपनी की वजह से है।

Sarvam का तूफान: 2026 की 87% फंडिंग अकेले

Sarvam ने 2026 में दो राउंड में कुल करीब 346 मिलियन डॉलर जुटाए — 255 मिलियन डॉलर का एक राउंड और 90 मिलियन डॉलर का दूसरा। राउंडिंग के छोटे अंतर के साथ कुछ रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 345 मिलियन डॉलर भी बताया गया है। किसी भी हिसाब से यह 2026 में सेक्टर की कुल 399 मिलियन डॉलर फंडिंग का करीब 87% है।

Sarvam को छोड़ दें तो बाकी सभी कंपनियों ने 2026 में 7 राउंड में सिर्फ 54 मिलियन डॉलर जुटाए। फिर भी यह पिछले साल के 23 मिलियन डॉलर से दोगुने से ज्यादा है, यानी छोटे खिलाड़ियों के लिए भी हालात सुधर रहे हैं — बस रफ्तार Sarvam जैसी नहीं है।

Sarvam और Krutrim दोनों की स्थापना 2023 में हुई थी और दोनों यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर चुकी हैं। Tracxn के मुताबिक Sarvam की कुल फंडिंग अब 389 मिलियन डॉलर और Krutrim की 75 मिलियन डॉलर है — दोनों मिलकर 464 मिलियन डॉलर, यानी कुल फंडिंग का 68%। Sarvam को HCLTech और Nvidia जैसे बड़े नामों का समर्थन हासिल है, और जून 2026 में इसने 1.5 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर यूनिकॉर्न का तमगा पाया था।

तुलना: कौन कहां खड़ा है

पैमानाSarvamKrutrimबाकी 32 कंपनियां (मिलकर)
कुल फंडिंग (अब तक)389 मिलियन डॉलर75 मिलियन डॉलर223 मिलियन डॉलर
कुल फंडिंग में हिस्साकरीब 57%करीब 11%करीब 32%
2026 में फंडिंगकरीब 346 मिलियन डॉलररिपोर्ट में अलग से नहीं बताया गया54 मिलियन डॉलर (Sarvam को छोड़कर)
स्थापना20232023अलग-अलग वर्षों में
दर्जायूनिकॉर्न (जून 2026, 1.5 अरब डॉलर वैल्यूएशन)यूनिकॉर्नअधिकतर अर्ली-स्टेज

नोट: ऊपर दिए गए हिस्से Tracxn के कुल 687 मिलियन डॉलर के आंकड़े से निकाले गए अनुमान हैं। कोर-प्रोडक्ट वाली 18 कंपनियों ने कुल 452 मिलियन डॉलर और फीचर-आधारित 16 कंपनियों ने 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं — राउंडिंग के कारण इनका जोड़ कुल आंकड़े से मामूली अलग हो सकता है।

यह केंद्रीकरण क्यों हो रहा है?

रिपोर्ट के मुताबिक निवेशक अब चुनिंदा कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं, जिनमें उनके हिसाब से बड़ा बनने की क्षमता है। एक वजह AI संप्रभुता की चिंता भी है — रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2026 में अमेरिकी सरकार द्वारा एक अमेरिकी कंपनी के मॉडल्स पर एक्सपोर्ट-कंट्रोल आदेश के बाद यह सवाल और तेज हो गया कि क्या विदेशी फ्रंटियर मॉडल्स पर निर्भरता सही है। इसी सोच ने घरेलू मॉडल बनाने वाली कंपनियों की ओर पैसा मोड़ा है।

दूसरी तरफ, छोटे खिलाड़ी भी मैदान में हैं। रिपोर्ट में Gnani AI का उदाहरण दिया गया है, जिसकी स्पीच रिकग्निशन एक दशक के भारतीय कॉल सेंटर ऑडियो पर ट्रेन की गई है और जिसने जुलाई 2026 में 4.2 मिलियन डॉलर का राउंड बंद किया। मतलब, देसी डेटा पर बनी खासियत अभी भी निवेशकों को खींच रही है।

रिपोर्ट का एक और अहम संकेत यह है कि इस सेक्टर में अभी पहला लेट-स्टेज राउंड आना बाकी है — रिपोर्ट के शब्दों में, वह राउंड यह संकेत देगा कि कम से कम एक कंपनी बनाने के दौर से बढ़कर स्केल करने के दौर में पहुंच गई है।

आम जनता और भारतीय युवाओं के लिए क्यों है खास?

अगर आप अब भी यही सोच रहे हैं कि AI सिर्फ अंग्रेजी बोलने वालों का खेल है, तो संभल जाइए — यह रिपोर्ट बताती है कि भारत की भाषाओं के लिए AI बनाना अब निवेशकों की नजर में सबसे बड़ा दांव है। इसका सीधा मतलब यह है कि हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली और दूसरी भारतीय भाषाओं में काम करने वाले AI प्रोडक्ट्स आने वाले सालों में और बेहतर, और सस्ते होंगे।

भारतीय युवाओं के लिए यह मौके की घंटी है। देसी भाषा AI में काम करने वाले डेवलपर, डेटा एनोटेटर, वॉइस आर्टिस्ट और प्रोडक्ट मैनेजर की मांग बढ़ेगी। जो युवा आज भारतीय भाषाओं के लिए स्पीच, ट्रांसलेशन या LLM फाइन-ट्यूनिंग सीख लेगा, वह कल उसी लहर पर सवार होगा जिस पर आज 687 मिलियन डॉलर का पैसा बह रहा है। समोसे की कीमत में मिलने वाले AI टूल्स की दुनिया अब हिंदी में भी उतनी ही ताकतवर होगी, जितनी अंग्रेजी में है।

और एक चेतावनी भी है — जब 68% पैसा सिर्फ दो कंपनियों के पास हो, तो छोटी कंपनियों और ओपन इनोवेशन पर नजर रखना जरूरी है। यूजर्स के तौर पर हमें यह देखना होगा कि देसी AI वाकई सबकी भाषा बोले, सिर्फ दो बड़े ब्रांड्स की नहीं।

इस लहर का फायदा उठाने के 5 कदम

  1. भारतीय भाषा AI की बुनियाद समझें — स्पीच रिकग्निशन, ट्रांसलेशन और LLM फाइन-ट्यूनिंग जैसे टॉपिक्स से शुरुआत करें।
  2. Sarvam और Krutrim जैसे प्लेटफॉर्म्स के पब्लिक टूल्स और डॉक्यूमेंटेशन को आजमाकर देखें कि वे भारतीय भाषाओं को कैसे संभालते हैं।
  3. अपनी मातृभाषा में एक छोटा AI प्रोजेक्ट बनाएं — जैसे ट्रांसलेशन बॉट या वॉइस असिस्टेंट — ताकि आपका पोर्टफोलियो भीड़ से अलग दिखे।
  4. Indic AI सेक्टर की फंडिंग और लॉन्च खबरों पर नजर रखें, ताकि नौकरी या फ्रीलांस मौके समय पर पकड़ सकें।
  5. देसी डेटा और भाषा की समझ को अपनी ताकत बनाएं — यही वह खासियत है जो विदेशी मॉडल्स आसानी से नहीं दे सकते।

निष्कर्ष

सीना ठोक के कहा जा सकता है कि भारत की Indic AI कहानी अभी शुरुआत में है, लेकिन उसका पैसा पहले से ही दो धुरंधरों के पास सिमट चुका है। Sarvam की 87% हिस्सेदारी 2026 की सबसे बड़ी कहानी है, और Sarvam-Krutrim की 68% हिस्सेदारी बताती है कि निवेशक बड़े दांव पर भरोसा कर रहे हैं। सवाल अब यह है कि क्या बाकी 32 कंपनियां भी इस लहर में अपनी जगह बना पाएंगी — और क्या भारतीय भाषाओं का AI वाकई हर भारतीय तक पहुंचेगा। जवाब आने वाले राउंड्स में मिलेगा, और हम उस पर नजर बनाए रखेंगे।

स्रोत: Tracxn रिपोर्ट “Indic AI: Building AI for Bharat” (28 अक्टूबर 2026) की कवरेज — Business Standard और Analytics India Magazine।

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